राजकीय

संघटन में ताकद है

 

कोई आक्रमक है,
कोई है मितभाषी,
कोई तेज दिमाख,
कोई है मृदुभाषी,
मुश्किलमेभी हसना
किसीकी आदत है,
सच है की….
संघटन मे ताकद है ।।

कोई झुककर,
तो कोई ठोककर,
कोई मुश्किल कार्य करे
विरोधीयों को रोककर,
कोई निर्धास्त रौद्र है,
तो कोई सदा सावध है,
सच है की ….
संघटन मे ताकद है ।।

कोई नितीज्ञ कृष्ण है
तो कोई पार्थ है,
कोई है व्यवहारी
तो कोई निस्वार्थ है,
सहिष्णू है कोई
वक्तृत्व तो किसींका
नेतृत्व निर्विवाद है,
सच है की…..
संघटन मे ताकद है ।।

सबको मिलाके
एक कडी बनती है,
संघटन के आगे
दुनिया डोलती है,
खुखार है तो कोई
विरोधीयोंकी आफत है,
सच है की…..
संघटन मे ताकद है ।।

शब्दरचना
पराग पिंगळे
यवतमाळ

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